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EV: महंगे ईंधन ने बदला यूरोपीय बाजार, नई और पुरानी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में आया भारी उछाल; जानें आंकड़ें

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Thu, 18 Jun 2026 02:42 PM IST
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सार

EV Demand Growth: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने यूरोप में इलेक्ट्रिक कारों की मांग को रफ्तार दी है। हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार नई और पुरानी दोनों ईवी की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सवाल है कि क्या महंगे ईंधन से ईवी की तरफ भागते हुए लोग इलेक्ट्रिक पर ही टिके रहेंगे या इनके सस्ते होता है, ईवी का क्रेज खत्म हो जाएगा। आइए जानते हैं इस लेख में विस्तार से...
 

Rising Fuel Costs Push Electric Car Demand Jumps Europe
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

Fuel Price Impact on EV: यूरोप में लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों का असर अब ईवी बाजार में साफ दिखने लगा है। एक ताजा रिपोर्ट में नई और सेकेंड हैंड दोनों तरह की इलेक्ट्रिक कारों की मांग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और सस्ते EV मॉडल्स की उपलब्धता भी इस बदलाव को मजबूती दे रही है।



ईरान युद्ध के बाद ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। पेट्रोल और डीजल के आसमान छूते दामों ने आदमी के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। ऐसे में अधिकतर नए खरीददार ईवी की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो चुका है, लेकिन तेल सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। इसी वजह से ईंधन कीमतें आने वाले महीनों तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
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नई EV रजिस्ट्रेशन में 34% की बढ़ोतरी

  • न्यू ऑटोमोटिव रिसर्च ग्रुप और ई-मोबिलिटी यूरोप के ताजा आंकड़ों की मानें तो, यूरोप के 17 प्रमुख बाजारों में मई 2026 के दौरान नई इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत बढ़ी है। इन बाजारों में कुल नई कार रजिस्ट्रेशन का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों का हो गया है।
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  • वहीं, रेनो के सीईओ फ्रांसिस प्रोवोस्ट का कहना है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कुछ देशों में कंपनी के ईवी ऑर्डर बुकिंग में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। हालांकि उनका मानना है कि अगर भविष्य में ईंधन कीमतें कम होती हैं तो यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
  • जबकि फोर्ड यूरोप के चीफ जिम बॉम्बिक का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों ने ग्राहकों की ईवी में रुचि बढ़ा दी है, लेकिन इसे पूरी तरह स्थायी बदलाव कहना अभी जल्दबाजी होगी।


सस्ती ईवी बना रही हैं बाजार को और मजबूत

  • इसका दूसरा कारण यूरोप में ऑटो कंपनियों की कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी है। पहले यहां ईवी खरीदने में सबसे बड़ी बाधा उनकी शुरुआती कीमत मानी जाती है, लेकिन अब यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
  • चीनी कंपनियां का रोल इसमें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि बीवाईडी ने हाल ही में बर्लिन में अपनी नई डोलफिन G लॉन्च की है, जो यूरोपीय ग्राहकों के लिए अपेक्षाकृत किफायती विकल्प के रूप में पेश की गई है।
  • पूर्व निसान एग्जीक्यूटिव एंडी पामर का कहना है कि कम कीमत में बेहतर फीचर्स वाली चीनी ईवी ने उपभोक्ताओं की दिलचस्पी को काफी बढ़ाया है।


पुरानी ईवी की मांग में भी तेजी 

  • यहां दिलचस्प बात यह है कि लाेग सिर्फ शोरूम से ही ईवी लेना नहीं पसंद कर रहे हैं। सेकेंड हैंड इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार भी मजबूत हो रहा है।
  • फ्रांस के OLX मार्केटप्लेस के अनुसार, मई महीने में चीनी इलेक्ट्रिक कार ब्रांड्स के लिए बिक्री संबंधी पूछताछ पिछले साल के मुकाबले चार गुना से ज्यादा बढ़ गई।
  • जर्मनी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Carwow (कारवॉव) के अनुसार, ईवी खरीदने में ग्राहकों की रुचि 40 प्रतिशत से बढ़कर 70 से 75 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है।
  • कंपनी का मानना है कि यह अब केवल अस्थायी ट्रेंड नहीं बल्कि एक बड़ा बाजार परिवर्तन बन चुका है।


टेस्ला की पुरानी कारों की कीमतों में भी सुधार

  • कुछ समय पहले ही टेस्ला की ओर से नई कारों की कीमतें घटाने से पुरानी टेस्ला कारों की रीसेल वैल्यू प्रभावित हुई थी, लेकिन अब बढ़ती मांग के चलते सेकेंड हैंड ईवी की कीमतें फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
  • डेनमार्क के Bilbasen (बिलबासेन) प्लेटफॉर्म का अनुमान है कि इस साल पुरानी इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।


पेट्रोल-डीजल कारों से सस्ती हैं पुरानी EV
अगर दोनों के दाम की बात करें तो ब्रिटेन में 2 से 4 साल पुरानी इलेक्ट्रिक कारें अपनी मूल कीमत के लगभग 33 प्रतिशत पर बिक रही हैं, जबकि समान उम्र की पेट्रोल या डीजल कारें औसतन 52 प्रतिशत मूल्य पर बिक रही हैं। यही वजह है कि सेकेंड हैंड ईवी खरीदारों के लिए बेहतर विकल्प बन रही हैं।

क्या यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा?

  • एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब केवल ईंधन की बढ़ती कीमतें ही ईवी बाजार को आगे नहीं बढ़ा रहीं। सस्ती नई और पुरानी इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती उपलब्धता, बेहतर चार्जिंग नेटवर्क और तकनीकी सुधार भी इस बदलाव को मजबूती दे रहे हैं।
  • Cox Automotive (कॉक्स ऑटोमोटिव) के इनसाइट डायरेक्टर फिलिप नोथार्ड के अनुसार, अगर भविष्य में ईंधन की कीमतें कम भी हो जाएं, तब भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। उनका मानना है कि ईवी बाजार अब स्थिर और मजबूत विकास की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
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