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कावेरी जल विवाद: कांग्रेस सरकार के खिलाफ CM विजय ने पीएम को लिखा पत्र; केंद्र से हस्तक्षेप करने की उठाई मांग

आईएएनएस, चेन्नई Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 26 May 2026 07:13 PM IST
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सार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक के मेकेदातु बांध परियोजना को खारिज करने की अपील की है। 

Tamil Nadu CM Vijay Urges PM Modi to Reject Karnataka Mekedatu Dam Project Over Cauvery Water Dispute Concerns
विजय, मुख्यमंत्री, तमिलनाडु - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

कावेरी जल विवाद एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना को मंजूरी न देने की मांग की है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह परियोजना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कावेरी जल बंटवारे के फैसलों का उल्लंघन कर सकती है और इससे तमिलनाडु के लाखों किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।



उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि कर्नाटक द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को तुरंत खारिज किया जाए, क्योंकि यह कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करती है। यह विवाद इसलिए गहरा गया है क्योंकि तमिलनाडु का मानना है कि यदि कर्नाटक कावेरी नदी पर यह नया जलाशय बनाता है, तो इससे राज्य के लाखों किसानों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। मुख्यमंत्री विजय ने चेतावनी दी है कि यह कदम न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद मिले समाधान को भी अस्थिर कर सकता है।
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विजय ने जताई कड़ी आपत्ति
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विजय ने इस बात पर हैरानी जताई कि जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग तमिलनाडु की आपत्तियों के बावजूद कर्नाटक के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में लिखा "कर्नाटक ने मेकेदातु परियोजना के लिए 'भूमि पूजन' की घोषणा करके सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह से उल्लंघन किया है।" उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के हालिया बयानों ने तमिलनाडु के किसानों के बीच भारी चिंता और बेचैनी पैदा कर दी है।
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वर्तमान में इस परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाएगी। सीएम ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को निर्देश दें कि मेकेदातु परियोजना की डीपीआर को खारिज किया जाए और कर्नाटक को बिना सहमति के आगे बढ़ने से रोका जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि कावेरी जल विवाद लगभग तीन दशकों तक चला और अंततः 16 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के साथ इसका समाधान निकला। यह फैसला अभी लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के अंतिम फैसले में मंजूरी नहीं दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस स्थिति को बरकरार रखा है।

जल संकट का क्षेत्र पहले से ही प्रभावित
सीएम विजय ने अपने पत्र में कहा कि कावेरी बेसिन पहले से ही एक जल-संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित है। यहां उपलब्ध जल संसाधनों का बंटवारा 50 प्रतिशत निर्भरता के आधार पर पहले ही तय किया जा चुका है। ऐसे में किसी नए बड़े बांध या जलाशय की अनुमति देना मौजूदा संतुलन को बिगाड़ सकता है।

67.16 टीएमसी परियोजना पर आपत्ति
उन्होंने कर्नाटक की प्रस्तावित 67.16 टीएमसी क्षमता वाली जलाशय परियोजना पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह परियोजना अनियंत्रित जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले प्रवाह को प्रभावित कर सकती है, जो तमिलनाडु के जल आवंटन का अहम हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का उल्लंघन का आरोप
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि ऊपरी राज्यों को ऐसे कोई भी कदम नहीं उठाने चाहिए, जिससे निचले राज्यों को तय जल आपूर्ति प्रभावित हो। उन्होंने दावा किया कि यह परियोजना सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन होगी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति का हवाला देते हुए बताया कि 2019 में इस परियोजना के पर्यावरण अध्ययन को भी अधूरा मानकर वापस कर दिया गया था।

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