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Third Front buzz: तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट, बिना चेहरे कैसे पार लगेगी थर्ड फ्रंट की नैया

Arjun Nirala एन. अर्जुन
Updated Wed, 22 Mar 2023 04:55 PM IST
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सार
Third Front buzz: तीसरे मोर्चे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और सपा काफी उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। दोनों मिलकर इसे आगे बढ़ाने पर काम भी कर रहे हैं। कांग्रेस को छोड़कर समान विचारधारा वाली क्षेत्रीय पार्टियों से आगामी दिनों में बातचीत करने का फैसला किया है...
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Third Front buzz: Building a third front won't be easy without face
Third Front buzz: Akhilesh Yadav with Mamata Banerjee - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पिछले दिनों कोलकाता में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विचार-विमर्श किया। दोनों ही पार्टियों ने एक सुर में कहा कि भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाने वाली पार्टियों से बातचीत की जाएगी। इसमें क्षेत्रीय पार्टियों का अहम योगदान होगा। इसके बाद एक बार फिर तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है कि बिना कांग्रेस कैसे कोई तीसरा मोर्चा बनेगा? लेकिन बंगाल में इसकी पृष्ठभूमि तैयार हो रही है और आगामी दिनों में इसके आगे बढ़ने की संभावना है, ताकि 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। इसी बीच, खबर आ रही है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस के प्रमुख एचडी कुमारस्वामी भी ममता बनर्जी से मिलने 24 मार्च को कोलकाता आ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बिडंवना यह है कि अभी तक तीसरा मोर्चा कोई सर्वमान्य चेहरा खोज नहीं पाया है और बिना चेहरे के क्या तीसरे मोर्चे की नैया पार लग पाएगी? जबकि दूसरी तरफ राजग का चेहरा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहेंगे।

तीसरे मोर्चे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और सपा काफी उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। दोनों मिलकर इसे आगे बढ़ाने पर काम भी कर रहे हैं। कांग्रेस को छोड़कर समान विचारधारा वाली क्षेत्रीय पार्टियों से आगामी दिनों में बातचीत करने का फैसला किया है। असल में विपक्षी नेताओं का एक समूह उन आठ दलों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है, जिनके नेताओं ने पांच मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पत्र लिखा था। इसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामले का हवाला दिया गया था। हालांकि इसमें कांग्रेस शामिल नहीं थी। फिलहाल यही एक मुद्दा है, जो विपक्षी दलों को एक साथ ला सकता है। क्योंकि कई मामलों में जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। बताया जा रहा है कि बहुत जल्द इन आठ दलों की बैठक होने वाली है। अगर सभी की सहमति मिल जाती है तो बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बीआरएस के तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव, राजद के बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, सपा के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, एनसीपी के शरद पवार और उद्धव ठाकरे शामिल हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस को इससे बाहर रखा जाएगा।

इस बीच, समाजवादी पार्टी ने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद यह घोषणा भी कर दी कि पार्टी ने भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की पूरी रणनीति बना ली है। 2024 में भाजपा का सूपड़ा साफ कर देंगे। लेकिन अभी तक दोनों ही बड़ी पार्टियां यह बताने से बच रही हैं कि तीसरे मोर्चे का चेहरा कौन होगा। किसके नेतृत्व में तीसरा मोर्चा लोकसभा चुनाव में उतरेगा। अभी इतना ही कहा जा रहा है कि चुनाव के बाद नेता तय होगा। लेकिन पार्टियां ये भूल रही हैं कि बिना चेहरे के उनकी नैया कैसे पार लगेगी, क्योंकि जनता अब बातों पर नहीं, चेहरे पर विश्वास करने लगी है। दूसरी तरफ अगर देखें तो 2024 में राजग के पास चेहरा होगा और दो बार के प्रधानमंत्री रहे, नरेंद्र मोदी उनका सबसे बड़ा चेहरा होंगे। राजग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2024 लोकसभा चुनाव में उतरेगा। लेकिन अगर तीसरा मोर्चा बनता है तो उनका चेहरा कौन होगा, जिसके नाम पर वे जनता के पास वोट मांगने जाएंगे। इस बात को सभी भली भांति जानते हैं कि बिना चेहरे के अगर तीसरा मोर्चा चुनाव में उतरता भी है, तो उसकी स्वीकार्यता बहुत कम होगी। इसलिए बंगाल में सागरदिघी उपचुनाव में हार के बाद पार्टी नेताओं से बातचीत करते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इशारों-इशारों में बड़ी बात कह दी है। ममता ने कहा था कि अगर कांग्रेस के राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने रहे तो नरेंद्र मोदी को हराना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। भाजपा चाहती है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने रहें।

यानि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इशारों-इशारों में साफ कर दिया कि अगर तीसरा मोर्चा बनता है, तो चुनाव में उतरने से पहले चेहरा तय करना होगा। दीदी को मालूम है कि किस समय पर क्या करना है और किस वक्त पर क्या बयान देना है। वे एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रही हैं। 2021 में दीदी ने अकेले अपने दम पर बंगाल में 213 सीटें जीती थीं, और भाजपा को 77 सीटों पर समेट दिया था। वहीं कांग्रेस और सीपीएम तो खाता भी नहीं खोल पाए थे (हाल ही में कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के सागरदिघी उपचुनाव जीत हासिल करके खाता खोला)। दीदी को मालूम है कि उसके बाद देश में उनकी स्वीकार्यता का दायरा बढ़ा है। देश के लोग उनको पहचानते हैं। उनकी राजनीतिक समझ और रणनीति को पूरा देश जानता है और मानता है। यह बात उल्लेखनीय है कि तीसरे मोर्चे में जीत के बाद दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी होगी।

इस बीच, कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा है कि देश में तीसरा, चौथा या पांचवां फ्रंट बने, कांग्रेस के बिना कोई भी फ्रंट संभव नहीं है। सपा और तृणमूल कांग्रेस का मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। अगर विपक्ष का संगठन बनता है, तो उसमें कांग्रेस की भूमिका अहम रहेगी। देश में तीसरे मोर्चे के गठन की बात चल पड़ी है। बनेगी या नहीं यह तो भविष्य की बात है, लेकिन राजनीतिक दलों के नेता मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तब तक इन बातों का कोई अर्थ नहीं, जब तक कि तीसरा मोर्चा किसी चेहरे के साथ 2024 के लोकसभा के चुनाव मैदान में नहीं उतरता। लोगों को सामने विकल्प देना होगा। राजग के नरेंद्र मोदी के सामने 2024 में तीसरे मोर्चे का चेहरा कौन। क्योंकि जनता पहले भी भानुमति की कुनबे का हश्र देख चुकी है।

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