Rajasthan: राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल का एलान, 23 फरवरी की आधी रात से होगा चक्काजाम; क्या है वजह?
Banswara News: परिवहन विभाग की कार्रवाई के विरोध में 23 फरवरी की आधी रात से निजी बस ऑपरेटरों ने राज्यव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। बांसवाड़ा के ऑपरेटर भी इसमें शामिल हैं। बसें बंद रहने से कई प्रमुख मार्गों पर यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
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राजस्थान में परिवहन विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट निलंबित करने और लाखों रुपये के चालान बनाने की कार्रवाई के विरोध में 23 फरवरी की आधी रात से निजी बस ऑपरेटरों ने अपने वाहन नहीं चलाने का निर्णय लिया है। इस राज्यव्यापी हड़ताल में बांसवाड़ा और जयपुर के निजी बस ऑपरेटर भी शामिल हो गए हैं और आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा की है। हड़ताल में स्टेट कैरिज, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और लोक परिवहन की बसें सम्मिलित होंगी।
लगेज कैरियर पर रोक से नाराजगी
राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर आरटीओ की कार्रवाई को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि बसों और टैक्सियों में लगेज कैरियर लगाने पर रोक लगा दी गई है और इस पर भी जुर्माना वसूला जा रहा है। ऑपरेटरों के अनुसार टूरिस्ट और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है। उनका यह भी कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत भारी-भरकम चालान बनाए जा रहे हैं। यदि सरकार और परिवहन विभाग के साथ बातचीत में समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
बांसवाड़ा से समर्थन और बैठक
आल इंडिया कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस एसोसिएशन से जुड़े बांसवाड़ा के निजी बस ऑपरेटरों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। इस संबंध में बांसवाड़ा में बैठक आयोजित की गई। बैठक में अध्यक्ष मुजफफर अली ने कहा कि बांसवाड़ा से चलने वाली सभी निजी बसों की ओर से चक्काजाम करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में प्रेम कुमार माटा, अनवर हुसैन, वसीम, कमल जैन, राजेश जैन, सईद सहित 16 एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यात्रियों पर पड़ सकता है असर
निजी बसों के संचालन बंद रहने से बांसवाड़ा सहित राजस्थान में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बांसवाड़ा से जयपुर, सीकर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, बुरहानपुर और मुंबई जाने वाले यात्रियों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना है। बांसवाड़ा से सर्वाधिक निजी बसें जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद और इंदौर मार्ग पर संचालित होती हैं।
ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का अल्टीमेटम
ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन, जयपुर ने राजस्थान सरकार और परिवहन विभाग के समक्ष AITP (ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट) टैक्स नीति और AIS-052, AIS-119 एवं AIS-153 मानकों के प्रतिगामी (रेट्रोस्पेक्टिव) प्रवर्तन को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि 23 फरवरी 2026 तक न्यायोचित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में बस संचालक चक्का जाम और हड़ताल के लिए मजबूर होंगे।
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एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2021 से “वन नेशन–वन परमिट–वन टैक्स” नीति लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य देशभर में पर्यटक और कॉन्ट्रैक्ट वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। इसके बावजूद राजस्थान में AITP परमिट पर अत्यधिक टैक्स वसूला जा रहा है, जो अन्य राज्यों की तुलना में तीन से सात गुना तक अधिक है। राजस्थान में जहां प्रति बस सालाना टैक्स करीब 7.8 लाख रुपये तक पहुंच रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में यही टैक्स लगभग 4.5 लाख रुपये है।
इसी टैक्स असमानता के कारण राजस्थान के हजारों बस मालिक अपने वाहनों का पंजीकरण अन्य राज्यों में कराने को मजबूर हो रहे हैं। एसोसिएशन के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 5000 से अधिक बसें राजस्थान छोड़कर दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड हो चुकी हैं, जिससे राज्य सरकार को हर महीने करीब 60 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह स्थिति तब है जब राजस्थान देश का सबसे बड़ा पर्यटन राज्य है।
सुरक्षा मानकों को लेकर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यात्री सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वैध फिटनेस प्रमाणपत्र वाली बसों में निर्माण के समय लागू सभी मानकों का पालन किया गया है। हालांकि, नई सुरक्षा प्रणालियों जैसे FDSS को पूर्व-पंजीकृत बसों पर तुरंत और प्रतिगामी रूप से लागू करना व्यावहारिक नहीं है। इससे बस संचालकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा और यह संवैधानिक प्रावधानों के भी विपरीत है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि 1 सितंबर 2025 से पहले पंजीकृत बसों पर AIS मानकों के तहत चल रही कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, AITP परमिट पर अन्य राज्यों के समान या कम टैक्स स्लैब लागू किया जाए और पूर्व-पंजीकृत बसों को संक्रमण अवधि दी जाए। संगठन ने सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और परिवहन विभाग की होगी।
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