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Amethi News: गुटखा-सिगरेट छोड़ा तो बदल गई जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 31 May 2026 12:10 AM IST
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अमेठी सिटी। सुबह की शुरुआत गुटखे की पुड़िया से और दिनभर सिगरेट के धुएं के साथ गुजरने वाली जिंदगी अब कई लोगों के लिए बीते दिनों की बात हो चुकी है। तंबाकू की लत छोड़ चुके लोगों का कहना है कि इस फैसले ने न सिर्फ उनकी सेहत सुधारी, बल्कि जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम किया।
मनोज कुमार पांडेय बताते हैं कि करीब 15 वर्षों तक गुटखा उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। रोजाना लगभग 100 रुपये खर्च होते थे। धीरे-धीरे मुंह और पेट की परेशानी बढ़ने लगी। दवा लेने पर भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने गुटखा छोड़ने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि अब स्वास्थ्य बेहतर है, शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और पहले की तुलना में अधिक बचत भी हो रही है।
जमुना प्रसाद मिश्र के अनुसार पान और तंबाकू के बिना दिन अधूरा लगता था। शुरुआत में आदत छोड़ना मुश्किल रहा, लेकिन परिवार के सहयोग और दृढ़ निश्चय से वह इस लत से बाहर निकल आए। अब उन्हें पहले की अपेक्षा अधिक सुकून और आत्मविश्वास महसूस होता है।
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अनूप तिवारी बताते हैं कि गुटखा छोड़ने के बाद जीवन में बड़ा बदलाव आया। पहले प्रतिदिन 200 से 300 रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब यही धन बचत में जुड़ रहा है। स्वास्थ्य में सुधार के साथ काम पर ध्यान भी बेहतर हुआ है।
इच्छाशक्ति से छूटती है लत
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि तंबाकू में मौजूद निकोटीन धीरे-धीरे शरीर को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इसी कारण इसकी आदत छोड़ना आसान नहीं होता। मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार का सहयोग इस लत से मुक्ति दिलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। रोज 100 रुपये का तंबाकू सेवन करने वाला व्यक्ति 10 वर्षों में करीब 3.6 लाख रुपये खर्च कर देता है। इसके साथ कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
एक नजर में तंबाकू का नुकसान
मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का खतरा
हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की आशंका
सांस संबंधी बीमारियों का बढ़ता जोखिम
लगातार आर्थिक नुकसान
पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव
तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय
तंबाकू छोड़ने की निश्चित तारीख तय करें
परिवार और मित्रों का सहयोग लें
तलब लगने पर फल, सौंफ या च्युइंगम का प्रयोग करें
नियमित व्यायाम और योग अपनाएं
आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लें
मनोज कुमार पांडेय बताते हैं कि करीब 15 वर्षों तक गुटखा उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। रोजाना लगभग 100 रुपये खर्च होते थे। धीरे-धीरे मुंह और पेट की परेशानी बढ़ने लगी। दवा लेने पर भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने गुटखा छोड़ने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि अब स्वास्थ्य बेहतर है, शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और पहले की तुलना में अधिक बचत भी हो रही है।
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जमुना प्रसाद मिश्र के अनुसार पान और तंबाकू के बिना दिन अधूरा लगता था। शुरुआत में आदत छोड़ना मुश्किल रहा, लेकिन परिवार के सहयोग और दृढ़ निश्चय से वह इस लत से बाहर निकल आए। अब उन्हें पहले की अपेक्षा अधिक सुकून और आत्मविश्वास महसूस होता है।
अनूप तिवारी बताते हैं कि गुटखा छोड़ने के बाद जीवन में बड़ा बदलाव आया। पहले प्रतिदिन 200 से 300 रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब यही धन बचत में जुड़ रहा है। स्वास्थ्य में सुधार के साथ काम पर ध्यान भी बेहतर हुआ है।
इच्छाशक्ति से छूटती है लत
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि तंबाकू में मौजूद निकोटीन धीरे-धीरे शरीर को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इसी कारण इसकी आदत छोड़ना आसान नहीं होता। मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार का सहयोग इस लत से मुक्ति दिलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। रोज 100 रुपये का तंबाकू सेवन करने वाला व्यक्ति 10 वर्षों में करीब 3.6 लाख रुपये खर्च कर देता है। इसके साथ कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
एक नजर में तंबाकू का नुकसान
मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का खतरा
हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की आशंका
सांस संबंधी बीमारियों का बढ़ता जोखिम
लगातार आर्थिक नुकसान
पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव
तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय
तंबाकू छोड़ने की निश्चित तारीख तय करें
परिवार और मित्रों का सहयोग लें
तलब लगने पर फल, सौंफ या च्युइंगम का प्रयोग करें
नियमित व्यायाम और योग अपनाएं
आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लें