जिले के गिरल गांव में पिछले दो महीनों से चल रहे श्रमिक आंदोलन के दौरान एक मजदूर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक के शव को बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक, स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि पहुंचे। घटना के बाद प्रशासन तथा आंदोलनकारियों के बीच वार्ता का दौर जारी है।
घटना के बाद शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी मोर्चरी पहुंचे और उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। भाटी ने कहा कि जैसाराम मेघवाल अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले दो महीने से गिरल माइंस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के निरंकुश और तानाशाही रवैये के कारण एक गरीब मजदूर की जान चली गई। विधायक ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिणाम बताते हुए कहा कि मजदूरों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
भाटी ने कहा कि गिरल क्षेत्र के लोग पिछले लगभग 30 वर्षों से अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि धरना स्थल पर पहले भी कई श्रमिकों और स्वयं उनकी तबीयत खराब हो चुकी है।
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घटना की जानकारी मिलने पर चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल तथा अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेन्द्र सिंह चांदावत भी जिला अस्पताल पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू की है।
गौरतलब है कि गिरल माइंस से निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली, सभी कर्मचारियों के लिए आठ घंटे की ड्यूटी लागू करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, श्रमिकों को नियमानुसार वेतन और बोनस उपलब्ध कराने तथा मूलभूत श्रमिक सुविधाएं सुनिश्चित करने जैसी मांगों को लेकर यह धरना पिछले दो महीनों से जारी है।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी करीब एक महीने से धरना स्थल पर मौजूद रहकर आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। फिलहाल मजदूर की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और सभी की निगाहें प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।