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Expo on Traditional Medicine: शंघाई सहयोग संगठन के तहत पारंपरिक चिकित्सा पर पहले B2B वैश्विक सम्मेलन का आयोजन

Arjun Nirala एन. अर्जुन
Updated Sat, 04 Mar 2023 12:32 PM IST
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सार

Expo on Traditional Medicine: म्यांमार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. थेट खिंग विन ने कहा, म्यांमार में पारंपरिक दवाओं को एक अमूल्य राष्ट्रीय विरासत माना जाता रहा है। हमारी संस्कृति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। पारंपरिक दवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए हम तरह से पारंपरिक दवाओं के विकास में सहयोग कर रहे हैं...

Guwahati to hold first B2B Global Conference and Expo on Traditional Medicine under SCO
Union Minister of Ports, Shipping & Waterways and Ayush, Sarbananda Sonowal - फोटो : Agency
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विस्तार

केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारत ने लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के साथ-साथ आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य पारंपरिक प्रणालियों के माध्यम से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। भारत के सहयोग से जामनगर में स्थापित किए जा रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम) के पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र, सदस्य देशों को पारंपरिक चिकित्सा की शिक्षा और पद्धतियों को मजबूत करने के लिए अपने संबंधित देशों में सक्षम कदम उठाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, इससे एससीओ देशों की पारंपरिक चिकित्सा को बल मिलेगा। उन्होंने ये बात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत पारंपरिक चिकित्सा पर पहले बी2बी वैश्विक सम्मेलन और एक्सपो का उद्घाटन करने बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उद्घाटन समारोह में 17 एससीओ (4 वर्चुअल) देशों और भागीदारों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री डॉ. महेंद्रभाई मुंजपारा, म्यांमार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. थेट खिंग विन व मालदीव के उप स्वास्थ्य मंत्री सफिया मोहम्मद सईद आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और समेत आयुष मंत्रालय के कई अधिकारियों की भी उपस्थिति रही।

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इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. महेंद्रभाई मुंजपारा ने कहा, भारत आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी की शिक्षा और पद्धतियों की गुणवत्ता पर बहुत जोर देता है। आयुष उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई नियामक प्रावधान और मान्यता तंत्र मौजूद हैं। भारत ने उनके प्रशिक्षण, अनुसंधान और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों और पश्चिमी चिकित्सा पद्धति को एकीकृत करने के लिए देश की 'एकीकृत चिकित्सा नीति' विकसित करने का बीड़ा उठाया है।

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पारंपरिक चिकित्सा म्यांमार की विरासत: स्वास्थ्य मंत्री

इस अवसर पर म्यांमार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. थेट खिंग विन ने कहा, म्यांमार में पारंपरिक दवाओं को एक अमूल्य राष्ट्रीय विरासत माना जाता रहा है। हमारी संस्कृति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। पारंपरिक दवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए हम तरह से पारंपरिक दवाओं के विकास में सहयोग कर रहे हैं।

आय का मुख्य स्रोत हुआ करती थी पारंपरिक दवाएं: सईद

मालदीव के उप स्वास्थ्य मंत्री सफिया मोहम्मद सईद ने कहा, कैसे पारंपरिक दवाएं लाखों लोगों के लिए आय का मुख्य स्रोत हुआ करती थीं, खासकर विकासशील देशों के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए। उन्होंने सर्वोत्तम प्रथाओं की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में हमारे पास उद्योग की सहायता के लिए कानूनी ढांचे और दिशानिर्देशों का अभाव है।

यह एक अदभूत मौका: हाइफा

बहरीन देश का प्रतिनिधि हाइफा हुमूद ने कहा, भारत के नेतृत्व में यह पहली एससीओ कॉन्फ्रेंस है। यह एक अद्भुत अवसर और मौका है। हमारे देश में हम आयुर्वेद को लेकर जो काम कर रहे हैं, वह बात मैं यहां रख पाई। और दूसरे देशों की बात भी हमने सुनी। यहां आकर जाना कि हमारे अलावा किन देशों में आयुर्वेद को लेकर कैसा काम चल रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन बहुत बड़ा है। वे सबको साथ लेकर चलते हैं। निश्चित ही आने वाले समय में इसका फायदा सबको होगा।

हमारी तो शिक्षा में शामिल है आयुर्वेद: मामखु

मंगोलिया की स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी और प्रतिनिधि युंचिमर्ग मामखु ने कहा, हमारे देश में तो आयुर्वेद शिक्षा में शामिल है। यह हमारे देश में तिब्बत से आया और हम इसे लेकर काफी गंभीर हैं। हमारी दवाओं में आयुर्वेद मूल में है। डॉक्टर और प्रैक्टिशनर्स मिलकर काम कर रहे हैं। अब पूरा विश्वास है कि इस तरह के आयोजन से आयुर्वेद का दायरा बढ़ेगा और मावन जाति को लाभ होगा। भारत ने इसका नेतृत्व करने का बीड़ा उठाया है। भारत से बहुत उम्मीदें हैं।

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