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चीन का कूटनीतिक दांव: ट्रंप की विदाई के बाद अब पुतिन का स्वागत, क्या बदलेंगे वैश्विक समीकरण?
पीटीआई, बीजिंग।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 19 May 2026 10:12 PM IST
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सार
ट्रंप के जाते ही पुतिन की बीजिंग में मौजूदगी यह साबित करती है कि चीन वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र बन चुका है। ईरान संकट और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच रूस और चीन का यह साझा कदम आने वाले दिनों में पश्चिम देशों की चुनौतियों को और बढ़ाएगा।
चीन पहुंचे पुतिन
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार रात दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर चीन पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के ठीक बाद हो रही इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पुतिन की यह मुलाकात वैश्विक राजनीति में नए समीकरण तय कर सकती है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों शीर्ष नेता द्विपक्षीय संबंधों, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह पुतिन की 25वीं चीन यात्रा है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच गहरी दोस्ती, तालमेल और मजबूत रणनीतिक संबंधों पर विशेष जोर दिया। गुओ ने कहा कि दोनों देश इस यात्रा को चीन-रूस संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। इससे दुनिया में अधिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
जिनपिंग और पुतिन की गहरी दोस्ती
साल 2012 में शी जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद से दोनों नेता दर्जनों बार मिल चुके हैं। बातचीत के दौरान वे अक्सर एक-दूसरे को 'प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करते हैं। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बेहद मजबूत है। व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और पश्चिमी प्रभाव का मुकाबला करने के प्रयासों के जरिए इनके संबंध लगातार प्रगाढ़ हुए हैं।
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यह भी पढ़ें: मीडिया पर भड़के ट्रंप: ईरान युद्ध कवरेज को लेकर जताई नाराजगी, कहा-पागलपन भरी रिपोर्टिंग से देश को हुआ नुकसान
ट्रंप के दौरे के ठीक बाद मुलाकात के मायने
पुतिन का यह दौरा इसलिए बेहद खास है क्योंकि यह डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा के ठीक बाद हो रहा है। ट्रंप ने जिनपिंग के साथ बंद कमरे में कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी। माना जा रहा है कि पुतिन और जिनपिंग अपनी बैठक में ट्रंप के इस दौरे पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
होर्मुज संकट और वैश्विक तेल बाजार पर हो सकती है बात
डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर कब्जा करना था। इस विवाद के कारण पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान, रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक सहयोगी है। ये दोनों देश ईरान के प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता भी हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए चीन अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तेल ईरान से आयात करता है। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह पुतिन की 25वीं चीन यात्रा है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच गहरी दोस्ती, तालमेल और मजबूत रणनीतिक संबंधों पर विशेष जोर दिया। गुओ ने कहा कि दोनों देश इस यात्रा को चीन-रूस संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। इससे दुनिया में अधिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
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जिनपिंग और पुतिन की गहरी दोस्ती
साल 2012 में शी जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद से दोनों नेता दर्जनों बार मिल चुके हैं। बातचीत के दौरान वे अक्सर एक-दूसरे को 'प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करते हैं। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बेहद मजबूत है। व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और पश्चिमी प्रभाव का मुकाबला करने के प्रयासों के जरिए इनके संबंध लगातार प्रगाढ़ हुए हैं।
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ट्रंप के दौरे के ठीक बाद मुलाकात के मायने
पुतिन का यह दौरा इसलिए बेहद खास है क्योंकि यह डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा के ठीक बाद हो रहा है। ट्रंप ने जिनपिंग के साथ बंद कमरे में कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी। माना जा रहा है कि पुतिन और जिनपिंग अपनी बैठक में ट्रंप के इस दौरे पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
होर्मुज संकट और वैश्विक तेल बाजार पर हो सकती है बात
डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर कब्जा करना था। इस विवाद के कारण पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान, रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक सहयोगी है। ये दोनों देश ईरान के प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता भी हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए चीन अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तेल ईरान से आयात करता है। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।