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चिलचिलाती धूप, ट्रक खराब और पानी खत्म: तड़प-तड़प कर मर गए 49 लोग, नाइजर का रेगिस्तान बना कब्रगाह
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 06 Jun 2026 04:22 PM IST
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सार
नाइजर के सहारा रेगिस्तान में एक ट्रक खराब होने के बाद पानी की कमी और भीषण गर्मी से 49 यात्रियों की मौत हो गई। ये लोग माली से ईद मनाने घर लौट रहे थे, जिनमें से केवल दो लोग 50 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे और प्रशासन को सूचना दी।
सहारा रेगिस्तान में मौत का तांडव
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर के सहारा मरुस्थल से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाने अपने घर लौट रहे 49 लोगों की प्यास के कारण तड़प-तड़प कर मौत हो गई। भीषण गर्मी के बीच बीच रेगिस्तान में ट्रक खराब हो जाना इन यात्रियों के लिए काल बन गया। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सहारा के खतरनाक रास्तों और वहां की प्रतिकूल परिस्थितियों को सामने ला दिया है।
बीच रेगिस्तान में टूटा ट्रक का साथ
नाइजर के अगाडेज प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, ये सभी लोग माली से अपने परिवार के साथ ईद मनाने के लिए नाइजर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान असमका से लगभग 80 किलोमीटर दूर उनका ट्रक अचानक खराब हो गया। चालक, उसके सहायकों और यात्रियों ने ट्रक को ठीक करने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन वे असफल रहे। पानी की सीमित मात्रा जल्द ही खत्म हो गई और चिलचिलाती धूप व भीषण तापमान के बीच यात्री फंस गए। आपूर्ति का कोई साधन न होने के कारण एक-एक कर 49 लोगों ने दम तोड़ दिया।
यह भी पढ़ें: यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला: रूस का सेंट पीटर्सबर्ग दहला, क्या पुतिन के प्रस्ताव ठुकराने से भड़के जेलेंस्की?
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दो जांबाज बचे, 50 किमी पैदल चलकर दी सूचना
इस मौत के तांडव के बीच दो लोग चमत्कारिक रूप से बचने में कामयाब रहे। अपनी जान बचाने के लिए इन दोनों ने भीषण गर्मी में करीब 50 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। पहले वे एक जल स्रोत तक पहुंचे और फिर असमका शहर पहुंचकर अधिकारियों को इस भयावह घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही गवर्नर जनरल इब्राह बुलामा ईसा के नेतृत्व में एक दल मौके पर पहुंचा, जहां उन्हें ट्रक के नीचे और आसपास दर्जनों बेजान शरीर मिले। बचाव दल ने सभी पीड़ितों को वहीं सामूहिक कब्रों में दफन कर दिया है।
सहारा में प्रवासियों की त्रासदी
यह इलाका शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में यूरोप जाने की कोशिश करते हैं। माली के तलहंडेक शहर से चला यह ट्रक कई दिनों तक रेगिस्तान की खाक छानता रहा। सहारा का यह हिस्सा अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और रिकॉर्ड तोड़ तापमान के लिए जाना जाता है, जहां एक छोटी सी तकनीकी खराबी भी मौत का वारंट साबित होती है। अगाडेज प्रशासन ने इस घटना को एक बड़ी मानवीय त्रासदी बताया है।
बीच रेगिस्तान में टूटा ट्रक का साथ
नाइजर के अगाडेज प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, ये सभी लोग माली से अपने परिवार के साथ ईद मनाने के लिए नाइजर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान असमका से लगभग 80 किलोमीटर दूर उनका ट्रक अचानक खराब हो गया। चालक, उसके सहायकों और यात्रियों ने ट्रक को ठीक करने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन वे असफल रहे। पानी की सीमित मात्रा जल्द ही खत्म हो गई और चिलचिलाती धूप व भीषण तापमान के बीच यात्री फंस गए। आपूर्ति का कोई साधन न होने के कारण एक-एक कर 49 लोगों ने दम तोड़ दिया।
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इस मौत के तांडव के बीच दो लोग चमत्कारिक रूप से बचने में कामयाब रहे। अपनी जान बचाने के लिए इन दोनों ने भीषण गर्मी में करीब 50 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। पहले वे एक जल स्रोत तक पहुंचे और फिर असमका शहर पहुंचकर अधिकारियों को इस भयावह घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही गवर्नर जनरल इब्राह बुलामा ईसा के नेतृत्व में एक दल मौके पर पहुंचा, जहां उन्हें ट्रक के नीचे और आसपास दर्जनों बेजान शरीर मिले। बचाव दल ने सभी पीड़ितों को वहीं सामूहिक कब्रों में दफन कर दिया है।
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यह इलाका शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में यूरोप जाने की कोशिश करते हैं। माली के तलहंडेक शहर से चला यह ट्रक कई दिनों तक रेगिस्तान की खाक छानता रहा। सहारा का यह हिस्सा अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और रिकॉर्ड तोड़ तापमान के लिए जाना जाता है, जहां एक छोटी सी तकनीकी खराबी भी मौत का वारंट साबित होती है। अगाडेज प्रशासन ने इस घटना को एक बड़ी मानवीय त्रासदी बताया है।