सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   global economic conditions and indian mentality way for economic development

वैश्विक संकट: क्या भारतीयों की मानसिकता आर्थिक विकास के अनुकूल है?

Dr. P Subramanya Chary डॉ. पी सुब्रमण्यमचारी
Updated Tue, 26 May 2026 01:15 PM IST
विज्ञापन
सार

आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में मानसिक पहलू महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मौजूदा समय में जारी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच क्या भारतीयों की मानसिकता इन परिस्थितियों को सहन करने और उनका सामना करने की स्थिति में है या नहीं?

global economic conditions and indian mentality way for economic development
कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी व अन्य (फाइल फोटो) - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- पीएम मोदी
विज्ञापन

विस्तार

हाल ही में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में आई गिरावट के कारण उत्पन्न संकट का सामना करने के लिए हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ उपाय सुझाए हैं। कुछ लोग उन्हें सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य अपनी-अपनी मानसिकता के आधार पर केंद्र सरकार के कार्यों की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या भारतीयों की मानसिकता इन परिस्थितियों को सहन करने और उनका सामना करने की स्थिति में है या नहीं।



आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में मानसिक पहलू महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मजबूत उपलब्धि प्रेरणा  लोगों को कठिन परिश्रम करने, रचनात्मकता दिखाने और साहसिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है। शिक्षा और कौशल विकास के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पादकता और रोजगार के अवसरों को बढ़ाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भविष्य-दृष्टि और दीर्घकालिक योजना व्यक्ति को बचत करने, निवेश करने और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में सहायता करती है। 

आत्मविश्वास और उद्यमशीलता की भावनानए व्यवसायों की स्थापना और आर्थिक विस्तार में योगदान देती है। परिवर्तन को स्वीकार करने की प्रवृत्ति तथा नई तकनीकों को अपनाने की मानसिकता आधुनिकीकरण को बढ़ावा देती है। अनुशासन, समयपालन और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता संस्थाओं के प्रदर्शन को बेहतर बनाती हैं।
विज्ञापन
Trending Videos


सामाजिक विश्वास और सहयोग की भावना लेन-देन की लागत को कम करके पारस्परिक सहयोग को बढ़ाती हैं। तार्किक सोच और समस्या-समाधान कौशल बेहतर निर्णय लेने में सहायक होते हैं। विश्व मानव मूल्य अध्ययन (World Values Survey) के आंकड़ों और संबंधित अध्ययनों के अनुसार, उच्च सामाजिक विश्वास (Trust) का संबंध आर्थिक प्रदर्शन और सामाजिक सहयोग से होता है। इसे विकास को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मानसिक गुण माना जाता है। 

सरकारी नेताओं की बातों पर विश्वास

महामारियों, युद्धों या आर्थिक मंदी जैसे बड़े संकटों के समय कुछ देशों के लोग अपने सरकारी नेताओं की बातों पर अन्य देशों के लोगों की तुलना में अधिक विश्वास करते हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) और एडलमैन की रिपोर्टों के अनुसार, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, सिंगापुर और डेनमार्क में सरकार पर जनता का विश्वास दुनिया में सबसे अधिक है। 

स्विट्जरलैंड में 82% से अधिक लोगों ने अपनी सरकार पर भरोसा व्यक्त किया, जबकि फ़िनलैंड में लगभग 76% लोगों ने विश्वास दिखाया। नॉर्वे और डेनमार्क में भी यह स्तर 60% से अधिक दर्ज किया गया। ये देश पारदर्शी शासन, कम भ्रष्टाचार, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में स्पष्ट जानकारी प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान इन देशों के लोगों ने वैक्सीन, लॉकडाउन और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित सरकारी निर्देशों का अधिक पालन किया। सिंगापुर में भी प्रभावी संकट प्रबंधन और सुव्यवस्थित नीतियों के कारण सरकार पर उच्च विश्वास बना रहा। इसके विपरीत, फ्रांस और इटली जैसे देशों में सरकारी नेतृत्व पर विश्वास काफी कम रहा और कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार यह लगभग 28% ही दर्ज किया गया। 

विशेषज्ञों के अनुसार, जब सरकारें विश्वसनीय जानकारी, त्वरित कार्रवाई और आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं, तब लोग अपने नेताओं पर अधिक भरोसा करते हैं। अध्ययनों से यह भी संकेत मिलता है कि उच्च विश्वास सामाजिक एकता को बढ़ाता है और सरकारों को संकटों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सहायता करता है। यह कहा जा सकता है कि उत्तरी यूरोप और कुछ एशियाई देशों में लोग राष्ट्रीय आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान सरकारी नेताओं पर सबसे अधिक निर्भर रहते हैं।  

भारतीय नागरिकों की मानसिकता

भारत में संकट के समय लोग मार्गदर्शन, सुरक्षा उपायों और भावनात्मक समर्थन के लिए सरकारी नेताओं पर निर्भर रहते हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने लोगों से अहिंसा और एकता अपनाने का आह्वान किया। 1965 के युद्ध के समय लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर सैनिकों और किसानों को देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

1971 के युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी ने नागरिकों को एकजुट रहने और राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया। 2001 के गुजरात भूकंप के समय सरकारी नेताओं ने लोगों से राहत दलों के साथ सहयोग करने और राहत सामग्री दान करने की अपील की। 2004 के हिंद महासागर सुनामी के दौरान तटीय क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और पुनर्वास कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए कहा गया।

2020 की कोविड-19 महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की और लोगों से घर में रहने, मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने का आग्रह किया। सभी परिस्थितियों में लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सरकारों का सहयोग किया। आर्थिक संकटों में सरकारें लोगों से शांत रहने और आर्थिक सुधारों का समर्थन करने की अपील करती हैं। इसलिए, भारत में विभिन्न समयों में सरकार के नेताओं ने आपात स्थितियों में लोगों के व्यवहार को मार्गदर्शन देने और प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
            
उच्च शिक्षा, अच्छे रोजगार और बेहतर जीवन स्तर के लिए भारतीयों की मजबूत आकांक्षाओं के कारण भारतीयों की मानसिकता आर्थिक विकास के अनुकूल बन रही है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-कॉमर्स जैसी नई तकनीकों को भारतीय तेजी से अपना रहे हैं, जो आधुनिकीकरण और आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है। पारिवारिक मूल्य बचत, बच्चों की शिक्षा में निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक योजना को प्रोत्साहित करते हैं।

स्टार्टअप्स और व्यवसायों की बढ़ती संख्या भारतीयों में आत्मविश्वास, नवाचार की सोच और जोखिम लेने की क्षमता में वृद्धि को दर्शाती है।

2025 में आई ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार 98.6% युवा भारतीय मानते हैं कि भारत डिजिटल सुपरपावर बन रहा है; 96.9% लोगों का मानना है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और आधार जैसी नवाचारों ने जीवन को आसान बना दिया है। नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में भारत दुनिया में सबसे अधिक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान करने वाला देश बन गया है। 

नासकॉम (NASSCOM) की रिपोर्टों के अनुसार पिछले दो दशकों में भारत में डिजिटल भुगतान लगभग 160 गुना बढ़ गए हैं। होम क्रेडिट इंडिया (Home Credit India) की “ग्रेट इंडियन वॉलेट 2025” रिपोर्ट के अनुसार 73% लोग मानते हैं कि वे अगले पांच वर्षों में अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे; 57% लोगों ने बताया कि उनकी आय में वृद्धि हुई है। यह भारतीयों में आर्थिक आशावाद को दर्शाता है।

इसी रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा पर खर्च में 34% की वृद्धि यह दिखाती है कि भारतीय परिवार शिक्षा को कितना महत्व देते हैं। 2026 तक 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप्स का गठन यह दर्शाता है कि भारतीयों में व्यवसायिक साहस और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ रही है।

भारतीय परिवार प्रणाली बचत, बच्चों की शिक्षा में निवेश और दीर्घकालिक सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, जो मानव संसाधन विकास में सहायक होती है। युवा जनसंख्या अधिक होने से उत्पादकता, उपभोग और बाजार विस्तार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। यात्रा, बेहतर जीवनशैली और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में बढ़ती रुचि भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

कुल मिलाकर, भारतीयों की मानसिकता आशावाद, मेहनती स्वभाव, तकनीक अपनाने की क्षमता और विकास की आकांक्षा से भरी हुई है, जो देश के आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत समर्थन के रूप में कार्य करती है।



-------------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed