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Kotputli Behror News: लाइमस्टोन खदान विवाद में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो और आरोपी गिरफ्तार; कई अब भी फरार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 10:26 PM IST
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सार
कोटपूतली के अजीतपुरा कलां-कुजोता स्थित लाइमस्टोन खदान पर ग्रामीणों और खनन पक्ष के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर कार्रवाई जारी है।
पुलिस अब तक पांच आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार।
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विस्तार
कोटपूतली के सरूण्ड थाना क्षेत्र के ग्राम अजीतपुरा कलां-कुजोता स्थित नेशनल लाइमस्टोन कंपनी की खदान पर ग्रामीणों और खनन पक्ष के बीच हुए पथराव, मारपीट और हिंसक झड़प के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से एक आरोपी को न्यायालय से जमानत मिल गई है।
विशेष टीम गठित की गई
सरूण्ड थानाधिकारी यशपाल सिंह ने बताया कि 1 जून को ग्राम अजीतपुरा कलां और कुजोता के मध्य स्थित नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के स्वीकृत खनन क्षेत्र में ग्रामीणों और खनन संचालकों के बीच विवाद के बाद मारपीट, पथराव, तोड़फोड़ और लाठी-भाटा संघर्ष की घटना हुई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान एवं डीएसपी उमेश निठारवाल के सुपरविजन में विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने सूचना संकलन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी प्रवीण (20) पुत्र सुरेश सैनी निवासी ढाणी मांझीवाला, केरली थाना भाबरू तथा विजय सिंह (23) पुत्र सिंहराम मेघवाल निवासी कारोड़ा थाना सदर बहरोड़ को गिरफ्तार किया। न्यायालय में पेशी के दौरान विजय सिंह को जमानत मिल गई, जबकि अन्य आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
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पुलिस के अनुसार, इससे पूर्व दीपक कुमार यादव, सुनील पांचाल और अनुराग सिंह शेखावत को एससी-एसटी एक्ट एवं आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
एफआईआर में नामजद कई प्रमुख आरोपी
वहीं, दूसरी ओर आंदोलनरत ग्रामीणों और खनन संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने जिला पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले के नामजद एवं मुख्य आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के दिन तीन कैंपर वाहनों में सवार होकर करीब 20 हथियारबंद लोग मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने फायरिंग तथा हमला किया था। उनका कहना है कि एफआईआर में नामजद कई प्रमुख आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि अब तक गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग खदान पर कार्यरत कर्मचारी हैं।
ग्रामीणों ने जांच में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खनन कार्य और डीप होल ब्लास्टिंग के विरोध में ग्रामीण करीब 300 दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। गत सप्ताह प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तीन सूत्रीय लिखित समझौते के बाद धरना समाप्त हुआ था।
ये भी पढ़ें- Nagaur News: कलेक्टर के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन पर उठाए सवाल
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 30 मई को प्रशासन ने लंबे समय से चल रहे धरना स्थल को हटाकर वहां रखा सामान जब्त कर लिया था। इसके बाद 31 मई को ग्रामीणों ने पुनः धरना शुरू करने की तैयारी की। इसी दौरान खनन संचालकों द्वारा धरना स्थल पर मिट्टी और पत्थर डाले जाने का आरोप भी लगा।
एक जून को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में करीब दस ग्रामीणों के घायल होने का दावा किया गया। मौके से पुलिस ने कुछ खाली कारतूस भी बरामद किए थे। हालांकि फायरिंग से किसी व्यक्ति के घायल होने की पुष्टि न तो पुलिस प्रशासन ने की है और न ही राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल प्रशासन ने। यही कारण है कि कथित फायरिंग की घटना अब भी जांच का विषय बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर सभी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
विशेष टीम गठित की गई
सरूण्ड थानाधिकारी यशपाल सिंह ने बताया कि 1 जून को ग्राम अजीतपुरा कलां और कुजोता के मध्य स्थित नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के स्वीकृत खनन क्षेत्र में ग्रामीणों और खनन संचालकों के बीच विवाद के बाद मारपीट, पथराव, तोड़फोड़ और लाठी-भाटा संघर्ष की घटना हुई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान एवं डीएसपी उमेश निठारवाल के सुपरविजन में विशेष टीम गठित की गई।
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पुलिस टीम ने सूचना संकलन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी प्रवीण (20) पुत्र सुरेश सैनी निवासी ढाणी मांझीवाला, केरली थाना भाबरू तथा विजय सिंह (23) पुत्र सिंहराम मेघवाल निवासी कारोड़ा थाना सदर बहरोड़ को गिरफ्तार किया। न्यायालय में पेशी के दौरान विजय सिंह को जमानत मिल गई, जबकि अन्य आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, इससे पूर्व दीपक कुमार यादव, सुनील पांचाल और अनुराग सिंह शेखावत को एससी-एसटी एक्ट एवं आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
एफआईआर में नामजद कई प्रमुख आरोपी
वहीं, दूसरी ओर आंदोलनरत ग्रामीणों और खनन संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने जिला पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले के नामजद एवं मुख्य आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के दिन तीन कैंपर वाहनों में सवार होकर करीब 20 हथियारबंद लोग मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने फायरिंग तथा हमला किया था। उनका कहना है कि एफआईआर में नामजद कई प्रमुख आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि अब तक गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग खदान पर कार्यरत कर्मचारी हैं।
ग्रामीणों ने जांच में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खनन कार्य और डीप होल ब्लास्टिंग के विरोध में ग्रामीण करीब 300 दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। गत सप्ताह प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तीन सूत्रीय लिखित समझौते के बाद धरना समाप्त हुआ था।
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 30 मई को प्रशासन ने लंबे समय से चल रहे धरना स्थल को हटाकर वहां रखा सामान जब्त कर लिया था। इसके बाद 31 मई को ग्रामीणों ने पुनः धरना शुरू करने की तैयारी की। इसी दौरान खनन संचालकों द्वारा धरना स्थल पर मिट्टी और पत्थर डाले जाने का आरोप भी लगा।
एक जून को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में करीब दस ग्रामीणों के घायल होने का दावा किया गया। मौके से पुलिस ने कुछ खाली कारतूस भी बरामद किए थे। हालांकि फायरिंग से किसी व्यक्ति के घायल होने की पुष्टि न तो पुलिस प्रशासन ने की है और न ही राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल प्रशासन ने। यही कारण है कि कथित फायरिंग की घटना अब भी जांच का विषय बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर सभी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।